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धैर्य पर हमें लेक्चर ना दे – सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से कहा 

Supreme Court on Farmer Protest
Supreme Court on Farmer Protest

नई दिल्ली : किसान आंदोलन पर शीर्ष अदालत ने सरकार को फटकार लगाते हुए 5 कड़ी बातो में कहा की सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है की वे आंदोलन को ख़त्म करने के पक्ष में है भी की नहीं। शीर्ष अदालत ने कहा की सरकार द्वारा इस मुद्दे को संभालने से बेहद निराश” है। इसके अलावा और कड़ी 5 बाते न्यायधीश ऐस ऐस बोबडे ने कही जो इस प्रकार है।

हम कृषि और अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ नहीं हैं। हमें बताएं कि क्या आप इन कानूनों को रोकेंगे या हम इसे करेंगे। यहां प्रतिष्ठा का मुद्दा क्या है? “मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने सरकार से कहा। हम नहीं जानते कि आप समाधान का हिस्सा हैं या समस्या का हिस्सा हैं,” शीर्ष अदालत ने जोर दिया

मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा, “हमें इस बात की आशंका है कि किसी दिन, शांति भंग हो सकती है। हममें से हर कोई ज़िम्मेदार होगा यदि कुछ भी गलत हुआ तो हम अपने हाथ पर कोई चोट या खून नहीं चाहते।

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह “सरकार के इस मुद्दे से निपटने से बेहद निराश है” और जोर देकर कहा: “हम नहीं देखते कि आप इस मुद्दे से प्रभावी ढंग से निपट रहे हैं”। अदालत ने कहा, “हम नहीं जानते कि आपने कानूनों से पहले कौन सी परामर्श प्रक्रिया का पालन किया। कई राज्य इन कानूनों का विरोध कर रहे  हैं।

अदालत ने कहा, “विरोध का अधिकार बरकरार है। विरोध प्रदर्शन का अधिकार (महात्मा) गांधी जी के सत्याग्रह की तरह होना चाहिए। इसे शांति से करें।” यह भी कहा कि केंद्र “पिछली सरकारों को दोष नहीं दे सकता है”।

“हमने पिछली सुनवाई में पूछा है, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। स्थिति बदतर हो गई है। लोगों ने आत्महत्या कर ली है। इस मौसम में वृद्ध और महिलाएं आंदोलन का हिस्सा क्यों हैं?” मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से सवाल किया। “वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को वापस जाने दें,” उन्होंने आग्रह किया।

 

इन बातो से स्पष्ट है की शीर्ष अदालत सरकार के इस ढुलमुल रवैये से नाखुश है और जल्दी ही इस बात का समाधान चाहती है।

पर क्या सुप्रीम कोर्ट को खुद अपनी स्पेशल पावर का इस्तेमाल करते हुए इन कानूनों पर फैसला लेना चाहिए। आपकी क्या राय है हमें कमैंट्स में बताइये।

 

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