आखिर कब होगा इस्लाम का अंत यह प्रश्न कई लोगों के दिमाग में है इसको सर्च भी खूब किया जाता है ठीक उसी तरह जैसे हिंदू धर्म के अंत की बात की जाती है दोस्तों भविष्य पुराण में हमें इस्लाम धर्म का उ मिलता है और उसके अंत की बात भी दोस्तों भविष्य पुराण में इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मोहम्मद का वर्णन आया था जिन्हें इस पुराण में महामद कहकर पुकारा गया है यह वर्णन मुस्लिम धर्म की ओर ही संकेत करता है वेदों में भी मुसल शब्द का प्रयोग हुआ है किंतु वेदों में यह व्यक्ति विशेष संबंधित ना होकर अन्य अर्थों में प्रयुक्त है भविष्य पुराण में आल्हा उदल की कथा भी वर्णित है जिसे भगवान शिव के साप से भीम कलयुग में मलेच्छ पैदा होता है क्योंकि उसने भगवान शिव के प्रति अपशब्दों वाली भाषा का प्रयोग किया था इसी पुराण में भोजराज और महामद के संवाद का वर्णन भी किया गया है मक्का महामद की जन्मभूमि थी तथा मदीना में वे जलकर भस्म हुए थे उन्हें शिष्यों ने उनके भस्म होने पर वहां की भूमि को मद से हीन पुकारा अर्थात मद हीना और इसका विकृत रूप ही मदीना है ममत्स हीन भूमि मदीना भविष्य पुराण का अगर हम विस्तृत अध्ययन करते हैं

तो उसमें तमाम ऐसी चीजें मिलेंगी जो आज के समय को बताएंगे जो मैंने रेफरेंस दिया है यह इंटरनेशनल जननल ऑफ संस्कृत रिसर्च में छपा हुआ है जिसे वंदना शर्मा जो कि शोध छात्रा रही हैं उनके द्वारा यह लिखा गया है आज केइस वीडियो में मैं आपको बताने वाला हूं कि क्या वाकई इस्लाम धर्म का अंत होने वालाहै और अगर इस्लाम धर्म का अंत होगा तो कब होगा आखिर हमें ऐसे कोई संकेत मिल भी रहेहैं या नहीं तो आज मैं आपको बताने वाला  हूं कि कैसे कई देश इस्लाम से मुक्त हुएजा रहे हैं कैसे इस्लाम की धरती पर जन्मे लोग इस्लाम से भाग रहे हैं आखिर क्या है इस्लाम के अंत के संकेत और हिंदू धर्म के छा जाने के संकेत क्यों कहा जा रहा है कि जिस मदीना की धरती से इस्लाम का उदय हुआ था वहीं पर अब हिंदू धर्म छाएगा आखिर कौन-कौन से हैं वह देश जिन्होंने इस्लाम पर बैन लगाने की तैयारी कर ली है

कहां-कहां से मुक्त हो गया है इस्लाम आखिर कहां पे अरबी शेख भी अब हिंदू धर्म अपना रहे हैं क्यों मदीना की धरती पर हो रहा है ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार सूडान पर मिस्र और ब्रिटेन का शासन हुआ करता था वर्ष 19 1952 में यहां आजादी के लिए जनमत संग्रह हुआ इसके बाद 1956 में सूडान को आजादी मिली हालांकि आजादी मिलने के बाद दक्षिणी सूडान की आबादी बहुत ज्यादा खुश नहीं थी नतीजा यह हुआ कि उत्तर सूडान और दक्षिण सूडान के बीच गृह युद्ध छिड़ गया और 17 सालों तक चला एक अनुमान है कि इसमें 5 लाख से अधिक लोग मारे गए थे 1972 में शांति समझौते के बाद गृह युद्ध खत्म हुआ इसके 10 वर्ष बाद फिर से गृह युद्ध छिड़ गया जो 2005 तक चला फिर 2005 में सूडान सरकार और पीपल्स लिबरेशन आर्मी के बीच शांति समझौता हुआ समझौते में तय हुआ कि दक्षिण सूडान को नया देश बनाया जाएगा क्योंकि दक्षिणी सूडान ईसाई बहुल था

और उत्तरी सूडान मुस्लिम बहुल इसी समझौते के बाद 9 जुलाई 2011 में दक्षिणी सूडान अफ्रीकी महाद्वीप का 54 वां देश बना सूडान के दो हिस्से तो हो गए लेकिन लेकिन तनाव फिर भी कम नहीं हुआ उसकी वजह यह थी कि दक्षिणी सूडान में खनिज तेल के भंडार थे जिसको लेकर उत्तर और दक्षिण सूडान लड़ते रहे 2012 में फिर समझौता होता है जिसमें तय हुआ कि सीमा के 10 किलोमीटर दायरे को डीमली किया जाएगा यानी वहां किसी भी देश की सेनाएं नहीं रहेंगी और दक्षिणी सूडान तेल का निर्यात जारी रखेगा उत्तरी सूडान में चल रहे मौजूदा संघर्ष की जड़े अप्रैल 2019 से जुड़ी हुई प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 1989 में उमर अल बशीर ने उत्तरी सूडान की सत्ता पर कब्जा कर लिया था और उसने सूडान में इस्लामिक कानून शरिया लागू कर दिया था वर्ष 2019 में सूडान की जनता ने उमर अल बशीर के खिलाफ विद्रोह कर दिया और वहां की सेना ने अल बशीर की सत्ता को उखाड़ फेंका बशीर के सत्ता से बेदखल होने के बाद सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच समझौता हुआ और अब्दुल्ला हम लोक को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया जिसके बाद सूडान की सरकार ने यह तय किया कि देश को लोकतांत्रिक बनाया जाएगा और शरिया कानून समाप्त कर दिया जाएगा

इस समझौते के तहत एक सोव निटी काउंसिल बनी और तय हुआ कि वर्ष 2023 के आखिर तक चुनाव करवाए जाएंगे वर्ष 2020 में सूडान सरकार ने आखिरकार इस्लामी शासन को समाप्त कर दिया प्रधानमंत्री अब्दुल्ला हमो ने सुनिश्चित किया कि सूडान अब लोकतांत्रिक देश होगा यह देश अब संविधान से चलेगा जहां सभी नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित किया जाएगा लेकिन इससे भी बात नहीं बनी अक्टूबर 2021 में सेना ने तख्ता पलट कर दिया और जनरल बुरहान देश के राष्ट्रपति बन गए तथा आरएसएफ लीडर मोहम्मद हमदान डगाल उपराष्ट्रपति बन गए सूडान में मिलिट्री रूल हो गए देश में संविधान लागू करने और चुनाव कराए जाने को लेकर मिलिट्री और आरएसएफ के बीच संघर्ष जारी है मिलिट्री का कहना है कि सिविलियन रूल 2 साल में लागू हो जाने चाहिए जबकि आरएसएफ सिविलियन रूल को 10 साल बाद लागू कराना चाहती है सेना और आरएसएफ के बीच भले ही जंग चल रही है परंतु एक बात बिल्कुल साफ है कि सूडान में इस्लामिक शासन पूरी तरह से अब समाप्त किया जा चुका है और जल्द ही वहां पर एक लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना होगी और एक संविधान लागू किया जाएगा जब से मोहम्मद बिन सलमान सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस बने हैं तब से सऊदी अरब में कई बड़े बदलाव देखने में आए हैं इन परिवर्तनों की वजह से ही भारत और पाकिस्तान के अधिकतर मौलाना भड़के हुए हैं यहां तक कि सऊदी अरब में भी इस्लामिक धर्म गुरु सऊदी प्रिंस को इस्लाम का खिलाफ बता रहे हैं उन्हें लग रहा है कि सऊदी अरब से इस्लाम की विदाई होने वाली क्योंकि मोहम्मद बिन सलमान साहब सऊदी अरब में टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ा वा देने के लिए इस्लामी शरीयत में भी लगातार बदलाव कर रहे हैं विजन 2030 के तहत उन्होंने सऊदी अरब के कई कड़े कानून समाप्त कर दिए हैं

कि उस दिन से डर जाए कि यह मुल्क सेकुलर हो जाए अगर हमारी जैसी दो चार आवाजें और नाना उठी मौलवियों को तो लोगों ने वैसे ही तलाक दे दी ई है सेकुलर हो जाएंगे लोग इसके अलावा सऊदी सरकार ने हाल ही में एक प्रस्तावित शहर का थडी वीडियो जारी किया जिसे देखने के बाद सऊदी प्रिंस दुनिया भर के मुसलमानों के निशाने पर आ गए लोग कह रहे हैं कि सऊदी प्रिंस अब शायद एक्स मुस्लिम बन चुके हैं खुद मुस्लिम ही कह रहे हैं कि सऊदी प्रिंस ने इस्लाम को छोड़ दिया चलिए इसे क्रमवार तरीके से समझते हैं वर्ष 2017 में सऊदी अरब की कमान मोहम्मद बिन सलमान के हाथों में पहुंची जब वो सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस बने इसके ठीक 2 साल बाद वर्ष 2019 में उन्होंने रेस्टोरेंट संबंधी नियमों में परिवर्तन किया सऊदी अरब के रेस्टोरेंट्स और होटलों में स्त्री और पुरुषों के लिए पहले अलग-अलग प्रवेश और निकासी द्वार होते थे रेस्टोरेंट्स के अंदर भी महिलाओं और पुरुषों के बैठने की जगह अलग-अलग थी

लेकिन मोहम्मद बिन सलमान ने इन प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया दिसंबर 2019 में सऊदी सरकार ने य घोषणा की कि पुरुषों और महिलाओं के लिए अब अलग-अलग प्रवेश द्वार नहीं होंगे साथ ही रेस्टोरेंट और होटलों में बैठने संबंधी सभी गैर जरूरी प्रतिबंधों को हटा दिया गया है मोहम्मद बिन सलमान का मानना है कि सऊदी अरब में स्त्री और पुरुषों के लिए समान कानून होने चाहिए और दुनिया भर के निवेशक सऊदी अरब में निवेश करें इसलिए वह सऊदी अरब का ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं ताकि सऊदी अरब एक उदारवादी देशों में आ सके लेकिन जैसे ही स्त्री और पुरुषों से संबंधित इस समान कानून की घोषणा मोहम्मद बिन सलमान ने की तो सऊदी अरब के साथ-साथ पूरी दुनिया के कट्टरपंथी भड़क उठे और इसे शरिया कानून के खिलाफ बताया इसके बाद वर्ष 2021 में सऊदी अरब ने तबलीग की जमात पर पूरी तरह से बैन लगा दिया वही तबलीगी जमात जिसको लेकर भारत में लॉकडाउन के टाइम काफी ज्यादा बवाल हुआ था और जैसे ही सऊदी अरब ने तबलीगी जमात पर बैन लगाया भारत समेत कई देशों के मुस्लिम संगठनों ने इसकी कड़ी आलोचना की मुस्लिम संगठनों ने इसे इस्लाम के खिलाफ बताया और इस्लाम के सिद्धांतों का पूरी तरह से उल्लंघन करार दिया

और आपको बता दें कि सऊदी अरब ने तबलीगी जमात को सिर्फ बैन ही नहीं किया बल्कि तबलीगी जमात को आतंकवाद का इंट्री गट बता दिया मुस्लिम संगठन लगातार इन चीजों का विरोध करते रहे फिर भी सऊदी अरब केवल यहीं तक ही नहीं रुका उसने इस्लाम के खिलाफ और भी कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए नए नियमों के तहत सऊदी अरब में मक्का मदीना को छोड़कर बाकी सभी मस्जिदों के लाउड स्पीकर पर पूर्णतया प्रतिबंध है बन ऑन द यू ऑफ लाउड स्पीकर्स फॉर म नॉ बी लिफ्ट रिंग रमदान सऊदी अरब में अब कोई भी मस्जिदों को दान नहीं दे सकता शाम ढलने के बाद मस्जिदों में इफ्तार पार्टी पर भी रोक लगा दी गई वहीं इसके अलावा भारत में जिस बुरका और हिजाब को लेकर के इतना बड़ा बवाल मचा है सऊदी अरब ने सीधे तौर पर ऐसे कानून बना दिए हैं जिनमें कहा गया है कि बुर्का या हिजाब किसी के लिए भी जरूरी नहीं है व उसकी मर्जी है चाहे तो पहने या फिर ना पहने इसके अलावा छोटे बच्चों को मस्जिद ले जाने पर भी रोक लगा दी गई मस्जिद में नमाज के लिए आने वाले हर व्यक्ति को पहचान पत्र दिखाना होगा किसी मस्जिद में यदि इबादत का समय लंबा रखा गया है तो उसकी निगरानी की जाएगी रोजा रखने वालों के लिए चंदा इकट्ठा नहीं किया जाएगा और यह वहां हो रहा है जहां से इस्लाम का उदय हुआ द फिथ रूल इज दैट मस बंड फ्रॉम कलेक्टिंग नेश फ्रॉम वरशिपर्स वेदर दैट बी टू फंड मल्स फॉर दोज ब्रेकिंग देर फस्ट और फॉर एनी अदर परपस एक तरफ जहां इस्लाम के खिलाफ सऊदी अरब ऐसे प्रतिबंध लगा रहा है वहीं दूसरी तरफ क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सऊदी अरब की यूनिवर्सिटीज के पाठ्यक्रम में रामायण व महाभारत को भी शामिल कर दिया जिससे कट्टर पंथी बोखला गए इन कट्टरपंथियों की एक जलन शांत नहीं हो पाती कि दूसरा कोई फरमान सामने आ जाता है दरअसल सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान यह नहीं चाहते कि दुनिया में सऊदी अरब की छवि एक कट्टर देश के रूप में जाए इसीलिए वह लगातार ऐसे कदम उठा रहे हैं प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट विजन 2030 के तहत राजधानी रियाद के केंद्र में न्यू मुरब्बा नामक एक बेहद आधुनिक शहर का निर्माण करने जा रहे हैं

इसलिए सऊदी सरकार ने इस प्रस्तावित शहर का एक वीडियो भी जारी कर दिया इस वीडियो में शहर के मुख्य आकर्षण और उसकी विशाल इमारत मुकाब के बारे में जानकारी दी गई इस विशाल इमारत की संरचना देखकर कट्टरपंथी एक बार फिर भड़क उठे और सऊदी अरब सरकार की आलोचना कर रहे हैं लोगों का कहना है कि मुकाब और काबा की संरचना बिल्कुल एक जैसी है और काबा और मुकाब का अर्थ भी अरबी में में एक ही है यानी घनाकार आकृति इस विशाल संरचना को लेकर सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि क्राउन प्रिंस सलमान एक अलग काबा बना रहे हैं जो सिर्फ मनोरंजन के लिए है और यह इस्लाम का अपमान है रिपोर्ट के अनुसार यहां पर संग्रहालय टेक्नोलॉजी और डिजाइन यूनिवर्सिटीज एक विशाल काई थिएटर और अन्य मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक स्थल बनाए जाएंगे रिपोर्ट में बताया गया है कि इस शहर में मुकाब नामक एक विशाल इमारत मील का पत्थर साबित होगी सभी तकनीकों से लैश यह इमारत 400 मीटर ऊंची 400 मीटर चौड़ी और 400 मीटर लंबी दुनिया की सबसे बड़ी इमारतों में से एक होगी यानी कम शब्दों में कहा जाए तो यह संयुक्त अरब अमीरात की बुर्ज खलीफा जैसा पूरा इकोसिस्टम बनाने की बात सऊदी अरब कर रहा है

विजन 2030 के तहत बनने वाले इस प्रोजेक्ट से सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में 50 अरब डॉलर का फायदा होने की उम्मीद है कहा जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट 3 लाख 34000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां देगा इसके बावजूद प्रिंस सलमान का यह मेगा प्रोजेक्ट सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गया लोग लिख रहे हैं कि मोहम्मद बिन सलमान रियाद में अपना नया काबा बनवा रहे हैं हालांकि कुछ लोग इससे खुश भी हैं उनका कहना है कि इससे सऊदी अरब की विश्व में एक नई छवि बनेगी इसके अलावा अंदर ही अंदर ऐसी खबरें भी चल रही हैं कि क्राउन प्रिंस अब एक्स मुस्लिम बन चुके हैं एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब में एक्स मुस्लिम्स की संख्या अभी 5 प्र है और लगातार यहां इसमें बढ़ोतरी हो रही है तो आपको क्या लगता है क्या सऊदी अरब के ऐसे कदम इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं

कि सऊदी अरब का इस्लाम से मोह भंग होता जा रहा है आज पूरे विश्व में भगवत गीता का क्रेज दिखाई दे रहा है अमेरिका ब्रिटेन रूस ऑस्ट्रेलिया जर्मनी आदि यूरोपीय देशों में भगवत गीता इतनी लोकप्रिय है कि भगवत गीता पाठ के लिए बड़े-बड़े आयोजन किए जा रहे हैं श्री कृष्णार्जुन संपाद जन विज्ञान योगो नाम हॉलीवुड स्टार से लेकर नासा तक के वैज्ञानिक भगवत गीता में आस्था दिखा रहे हैं हजारों ईसाई ईसाइयत छोड़कर हिंदू धर्म अपना रहे हैं

अमेरिका और कनाडा में कई चर्च हरे कृष्ण मंदिर में तब्दील किए जा चुके हैं और लगभग ऐसा ही हाल अब खाड़ी देशों में भी दिखाई देने लगा है जी हां दोस्तों जिन खाड़ी देशों में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे की इबादत करना हराम था आज वहां मंदिर बन रहे हैं मूर्तियों की स्थापना की जा रही है हरिनाम संकीर्तन और शिवशंकर की जय की गूंज सुनाई दे रही है

जिन अरब देशों में कुरान के अलावा किसी और धर्म की पुस्तक पढ़ना एक गुनाह था उन्हीं अरब देशों में अब सरकारें स्वयं मंदिरों का निर्माण कर रही हैं उन्हीं अरब देशों में अब भगवत गीता की 15 करोड़ अरबी प्रतियां बिक चुकी हैं जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है इसके अलावा पाकिस्तान में अब भगवत गीता का क्रेज बढ़ रहा है लेकिन क्यों जरा आप यह वीडियो देखिए सवालात एक इंसान के जहन में उठते हैं इस्लाम में सवाल करने की इजाजत है नहीं बेसिक सवाल यह था मेरे जहन में कि अल्लाह ने सबको पैदा किया है वो कहता है कि जो कलमा नहीं पढ़ता उसको मैं जहन्नम की आग में जलाऊंगा मैं सोचता था कि यार मेरे बच्चे हैं अगर उसमें से एक बच्चा मेरी बात नहीं मानता तो क्या मैं उसको आग में जला सकता हूं दोस्तों भगवत गीता एक ऐसी पुस्तक है जिसमें साक्षात ईश्वर की वाणी है भगवत गीता में जो उपदेश भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिए थे

वह केवल अर्जुन के लिए नहीं थे बल्कि वह समस्त मानव जात के लिए थे इसीलिए जो कोई भी एक बार भगवत गीता पढ़ लेता है दुनिया के सारे धर्म ग्रंथ उसे झूठे लगने लगते हैं उसे जीवन से जुड़े सभी प्रश्नों का हल मिल जाता है सनातन धर्म और अब्राहम रिलीजन में क्या अंतर है यह आप पाकिस्तानी मुस्लिम से ही सुन लीजिए कि अल्लाह कहता है कुरान में कि भाई मेरी बात नहीं मानोगे तो मैं जहन्नम क्या आग में जलाऊंगा गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं

अर्जुन को कि मैंने तुम्हें सारा ज्ञान दे दिया सारी बातें समझा दी अब ये तुम पे है तुम मानो तो मानो नहीं मानो तो नहीं मानो तमाम मौलाना अक्सर य कहते हैं कि कुरान एक आसमानी किताब है जो कि स्वयं अल्लाह ने लिखी है और उनके लिए भेजी है परंतु इसमें लिखी अधिकांश बातें विज्ञान की दृष्टि से झूठी है गीता की जहां 100 फीसद बातें विज्ञान की कसौटी पर खरी उतरती है और वैज्ञानिक स्वयं ही भगवत गीता का अध्ययन करते हैं वहीं कुरान की सारी बातें विज्ञान की कसौटी पर झूठी साबित हो चुकी हैं

चाहे वह धर्ती का चपटी होना हो या चांद के दो टुकड़े कर देना हो भगवत गीता में जहां ब्रह्मांड का संपूर्ण वर्णन है वहीं कुरान में ब्रह्मांड का सही से वर्णन नहीं है यानी कि जिस अल्लाह ने धरती सूरज चांद तारे सब बनाए उसे खुद ही नहीं पता कि उनका आकार कैसा है दुनिया गोल है और यह शुरू से ही गोल रही है इसका मतलब यह हुआ के ये जो अल्फाज है ना कुरान में यह किसी खुदा के अल्फाज नहीं है किसी ने बताए हैं और यह उसने बताए हैं जिसको यूनिवर्स की नॉलेज बिल्कुल भी नहीं थी पृथ्वी सूरज चांद सितारे आज स्थिर हैं या चलायमान है अल्लाह को यह भी नहीं पता दोस्तों गीता और कुरान में से कौन सी पुस्तक ईश्वर द्वारा दी गई है इसका जवाब भी आप पाकिस्तानी मुस्लिम सही सुन लीजिए एक आदमी आता है और कहता है कि मैं जी हूं प्रोफिट मुझे अल्लाह ने भेजा है और मुझे ये किताब दी है और ये आसमान से उतरी है जी और ये रूल्स ऑफ लाइफ है ये आपने हर हालत में फॉलो करने और तलवार के जोर प जबकि सनातन 5 हज साल के इवोल्यूशन से बना है और यह एक दिन में एक किताब में एक आदमी ने आके नहीं दिया है इसमें वेद आए पुराने आए गीता रामायण इसमें मुख्तलिफ दौर में मुख्तलिफ सीख दी गई और एक बेसिक आईडियोलॉजिकल फैद डेवलप हुआ सुना दोस्तों उम्मीद है कि अब आप अच्छे से समझ गए होंगे कि असली ईश्वरीय पुस्तक कौन सी है अब आप जरा यह वीडियो देखिए और अब आपको दिखाते हैं एक पाकिस्तानी कैदी अपने साथ भागवत गीता ले गया एक हाथ में नारंगी रंग का बैग है दूसरे हाथ में काले रंग का बैग है और कंधे पर नीले रंग का बैग पुलिस के साथ जा रहा यह शख्स पाकिस्तानी कैदी जलालुद्दीन है जो अपने बैग में हिंदुओं के पवित्र धर्म ग्रंथ भागवत गीता को लेकर पाकिस्तान जा रहा है यह वीडियो कुछ समय पुराना है

इस पोस्ट में पाकिस्तानी कैदी है जो सजा काटकर जेल से छूटा है करीब 20 वर्ष पहले जलालुद्दीन नामक यह पाकिस्तानी वाराणसी के कैंट इलाके में संदिग्ध दस्तावेजों के साथ पकड़ा गया था जिसके बाद इसे 16 साल की सजा हुई इस दौरान जेल में इसने भगवत गीता पढ़ी जब यह पकड़ा गया था तो हाई स्कूल पास था भारतीय जेल में रहकर इसने एमए तक की पढ़ाई की और जब यह जेल से छूटा तो अपने साथ भगवत गीता भी पाकिस्तान ले गया इसके अलावा पाकिस्तान में भगवत गीता काफी ज्यादा लोकप्रिय पुस्तक है पाकिस्तान में रहकर आप मुस्लिम से हिंदू नहीं बन सकते क्योंकि पाकिस्तान में ऐसा कानून है जिसके कारण आपको क्रिमिनल बना दिया जाएगा इसीलिए लोग अब पाकिस्तान से बाहर जाकर या फिर पाकिस्तान में छिपकर ही हिंदू धर्म को फॉलो कर रहे हैं में कट्टर मौलाना हिंदू धर्म के खिलाफ माहौल बनाने में लगे हैं वे मंदिरों को तोड़ते हैं और जो कुछ बचे खचे हिंदू भी हैं उनको भी मुस्लिम बना रहे हैं पाकिस्तान में कोई एक दोज नहीं है

एफ आईए साइबर क्राइम की रिपोर्ट के मुताबिक इनकी तादाद पाकिस्तान में 4 लाख है आज अरब देशों से लेकर पाकिस्तान तक हजारों लाखों की संख्या में लोग भगवत गीता पढ़ रहे हैं और सनातन जीवन शैली अपना रहे हैं अरब देशों में लोग नास्तिक बन रहे हैं वहीं पाकिस्तान में एक्स मुस्लिम इन एक्स मुस्लिम की बढ़ती संख्या को देखकर पाकिस्तानी मौलाना सदमे में देखिए दोस्तों अगर कोई हिंदू दूसरे धर्म में कन्वर्ट होता है तो उसका सबसे पहला कारण अज्ञानता होता है उसे हिंदू धर्म के बारे में कुछ भी पता नहीं होता इसके अलावा भय और लालच या दो कारण होते हैं जबकि एक्स मुस्लिम पूरी कुरान सहित तमाम इस्लामिक स्टडी कर लेने के बाद एक्स मुस्लिम बनता है यदि विश्वास ना हो तो कोई भी एक्स मुस्लिम का स्कॉलर और मौलाना भी एक्स मुस्लिम्स के सवालों का जवाब नहीं दे पाते दोस्तों आपने देखा कि किस तरह पाकिस्तान में भगवत गीता लोकप्रिय हो रही है लोग एक्स मुस्लिम बन रहे हैं दोस्तों एक खबर आ रही है स्विजरलैंड से जहां पर सीधे तौर पर यह ऐलान कर दिया गया है कि अब स्विजरलैंड में बुरका पैन होगा जी हां स्विजरलैंड ने बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है स्विटजरलैंड संसद के निचले सदन ने बुधवार को बुर्का बैन करने का प्रस्ताव पारित कर दिया अब स्विटजरलैंड में सार्वजनिक स्थानों पर मुंह नाक और आंख ढकने वाले नकाब या बुर्के नहीं पहने जा सकते यदि फिर भी कोई इसे पहनता है तो उस पर 1000 स्विस फ्रैंक यानी 92000 का भारी भरकम जुर्माना लगेगा स्विट्जरलैंड की संसद में 151 सांसदों ने बुरका और नकाब बैन करने के पक्ष में अपना वोट दिया जबकि इसके विरोध में मात्र 29 सांसद ही थे यानी उच्च सदन में जाने से पहले ही यह बिल पारित कर दिया गया

आपको बता दें कि सुजरलैंड की कुल जनसंख्या करीब 89 लाख है इनमें से 63 फीदी ईसाई और 6 फीदी मुस्लिम हैं जबकि 30 फीदी लोग किसी भी धर्म को नहीं मानते कट्टरपंथी इस खबर से काफी ज्यादा परेशान दिखाई दिए पांच जन ने जब इस खबर को ट्वीट किया तो उसके नीचे कट्टरपंथी अपना दर्द छिपा नहीं पाए रिजवान नाम के शख्स ने लिखा कि कनाडा में आरएसएस को प्रतिबंधित कर दिया गया है फहीम अहमद लिखते हैं कि संघी यूरोप के कल्चर को क्यों अपनाना चाहते हैं इसी तरीके से और भी कई इस्लामिक कट्टरपंथी अपना दर्द नहीं छिपा पाए वहीं कई इस्लामिक देशों में भी इसके खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है यूरोप में स्थित स्लोवाकिया नामक देश में मुस्लिमों को कोई अधिकार नहीं दिया गया है एक रिपोर्ट के अनुसार वहां की पार्लियामेंट ने प्रस्ताव लाकर इस्लाम पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है

आपको जानकर हैरानी होगी कि एक तरफ भारत में सीएए कानून बनाने में जहां सरकार के पसीने छूट गए थे विपक्ष लगातार विरोध कर रहा था शाहीनबाग सहित देश के कई हिस्सों में धरना प्रदर्शन हुआ जबकि सबको मालूम था कि सीए कानून नागरिकता देने का कानून है फिर भी इसका विरोध हुआ वहीं दूसरी तरफ स्लोवाकिया में सत्ता में मौजूद स्लोवाक नेशनल पार्टी जब इस्लाम पर बैन लगाने के लिए विधेयक लेकर आई तो विपक्ष ने भी पूर्ण सहयोग देते हुए इसे पूर्ण बहुमत से पारित करवाया जिसके बाद स्लोवाकिया में इस्लाम पर पूरी तरह प्रतिबंध लग गया कहने का अर्थ है कि स्लोवाकिया में कोई भी नागरिक अब खुद को मुस्लिम रजिस्टर नहीं करा सकता यही नहीं स्लोवाकिया में धर्म की लिस्ट में अब इस्लाम का नाम भी नहीं है स्लोवाकिया में यह सब इसलिए हुआ क्योंकि वहां की सरकार का यह मानना था कि इस्लामिक कट्टर पंथ व चरम पंथ के पीछे इस्लाम की वह शिक्षा है जो मस्जिदों और मदरसों के जरिए लोगों के बीच पहुंचकर समाज में नफरत पैदा करती है

प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 में यहां मुस्लिमों की आबादी 5000 के आसपास थी जो देश की कुल आबादी का 0.1 फीदी थी सतवीं सदी के आसपास आए तुर्क व उइगर मुस्लिम यहां बस गए थे स्लोवाकिया पहले युगोस्लाविया कहलाता था परंतु आंतरिक कला के चलते जब यह टूटा तो स्लोवाकिया एक अलग देश बन गया युगोस्लाविया के टूटने से बने देश बेसिया व अल्बानिया से भी तमाम मुस्लिम यहां शरणार्थी के रूप में पहुंचे थे स्लोवाकिया यूरोपीय यूनियन का सदस्य जरूर है परंतु यह सबसे बाद में इसका सदस्य बना है वर्ष 2015 में यूरोप के सामने शरणार्थियों का प्रवास एक बड़ा मुद्दा बना हुआ था उस समय स्लोवाकिया ने 200 ईसाइयों को शरण दी लेकिन मुस्लिम शरणार्थियों को आने से मना कर दिया इस पर स्पष्टीकरण देते हुए स्लोवाकिया के विदेश मंत्रालय ने कहा था

कि उनके यहां मुस्लिमों के धार्मिक इबादत संबंधी कोई जगह नहीं है इसीलिए मुस्लिमों को ण देने से उनके देश में कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं हालांकि यूरोपीय यूनियन ने स्लोवाकिया के इस फैसले की आलोचना भी की थी परंतु इसके बाद 30 नवंबर 2016 को स्लोवाकिया ने एक कानून पास करके इस्लाम को हमेशा के लिए अपने देश में बैन कर दिया यहां यहां भी बताते चलें कि स्लोवाकिया में नियम और कानून शक्ति से पालन किए जाते हैं जैसे कि यहां हर किसी को अपना पहचान पत्र हमेशा अपने साथ रखना होता है यहां ध्वनि प्रदूषण से निपटने के लिए भी बड़ा कानून है यहां आप सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम शम 6:00 बजे तक हल्ला नहीं मचा सकते किसी से खराब व्यवहार नहीं कर सकते ऐसा करने पर ना सिर्फ पुलिस पकड़ती है बल्कि मोटा जुर्माना भी हो सकता है इस्लामिक चरमपंथियों के बढ़ते भय और लगातार बढ़ते प्रवासी संकट के बीच इस देश के राजनेताओं ने समस्या पर गंभीरता से विचार किया जिसके बाद उन्होंने इस्लाम पर पूर्व प्रतिबंध लगाया यहां के मुसलमान या तो किराय के घरों में रहते हैं या फिर अस्थाई प्रार्थना घरों में कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि स्लोवाकिया एकमात्र वह देश है जहां मुसलमानों को कोई भी वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है आपका स्लोवाकिया के विषय में क्या सोचना है कमेंट करके बताएं क्या अन्य देशों में भी ऐसे कानून होने चाहिए या भी कमेंट करें मिलते हैं आपसे अगले पोस्ट में तब तक के लिए जय हिंद जय भारत वंदे मातरम  

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